मृत्यु योग कैसे बनता है?

योगारिष्ट मृत्यु तब होती है, जब अष्टम भाव शनि, मंगल जैसे क्रूर ग्रहों से दूषित होकर लग्न में बैठा विपरीत ग्रह वक्री हो । कई विशिष्ट योगों के कारण जातक की मृत्यु होती है इसलिए इसे योगारिष्ट कहते हैं । अमावस्या से पहले की चतुर्दशी, अमावस्या और अष्टमी को यह योग पूर्ण प्रभाव में रहता है ।

Leave a Comment